आर्यसमाजी की ‘जाति-गत जनगणना’

घर के आँगन में आरामकुर्सी पर बैठे, बाबूलाल आर्य ने तंबाकू मलते हुए उपदेश देना शुरू किया, “देखो बेटा कलुआ, ऋषि दयानंद ने इस जात-पात की बेड़ी को न तोड़ा होता, तो हम आज भी सवर्णों के बाड़े में गोबर उठा रहे होते, उनके चाकर बने होते। महर्षि ने हमें सिर उठाना सिखाया, आँख से…

Read More