मनोरमा (वैदिक कथा)

सम्राट रथवीति ने देखा – गोमती नदी की पावन धारा स्वर्णिम बालुका पर कुसुमित नीप वृक्षों की छाया में मन्द-मन्द प्रवाहित हो रही है, मानो कोई ललिताङ्गी वधू सुवर्ण सूत्रों से बुनी हुई शाटिका धारण कर मनोहर नृत्य कर रही हो। पुण्यतट के समीप जल में कमलिनियाँ खिली हुई हैं, जैसे नदीदेवी के अधरों पर…

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