वेदानर्थक दयानंद

दयानन्द (सत्यार्थ प्रकाश ) में लिखते है — इमां त्वमिन्द्र मीढ्वः सुपुत्रां सुभगां कृणु। दशास्यां पुत्रान् आधेहि पतिमेकादशं कृधि॥ दयानन्द का अर्थ – हे (मीढ्वः इन्द्र) वीर्य सेचन में समर्थ ऐश्वर्ययुक्त पुरुष! तू इस विवाहित स्त्री या विधवा स्त्रियों को श्रेष्ठ पुत्र और सौभाग्ययुक्त कर। इस विवाहित स्त्री में दश पुत्र उत्पन्न कर और ग्यारहवें…

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वेदभ्रान्तार्थकर्ता दयानन्द

किसी स्त्री का पति मृत्यु को प्राप्त हो जाए, और वह दुखियारी स्त्री पति की मृत देह के समीप बैठकर बिलख-बिलख कर रो रही हो, और कोई व्यक्ति आकर उस स्त्री से कहे कि – “हे विधवा, तू इस मरे हुए पति की आशा छोड़ , तू यहाँ जो जीवित पुरुष खड़े हैं, उनमें से…

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