वेदानर्थक दयानंद
दयानन्द (सत्यार्थ प्रकाश ) में लिखते है — इमां त्वमिन्द्र मीढ्वः सुपुत्रां सुभगां कृणु। दशास्यां पुत्रान् आधेहि पतिमेकादशं कृधि॥ दयानन्द का अर्थ – हे (मीढ्वः इन्द्र) वीर्य सेचन में समर्थ ऐश्वर्ययुक्त पुरुष! तू इस विवाहित स्त्री या विधवा स्त्रियों को श्रेष्ठ पुत्र और सौभाग्ययुक्त कर। इस विवाहित स्त्री में दश पुत्र उत्पन्न कर और ग्यारहवें…


